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सुनन नसाई

नंबर 4188

नंबर 4188किताब 39, नंबर 40
أَخْبَرَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي مُوسَى بْنُ عُقْبَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كُنَّا حِينَ نُبَايِعُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ يَقُولُ لَنَا ‏ "‏ فِيمَا اسْتَطَعْتُمْ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar said:"When we gave our pledge to the Messenger of Allah to hear and obey, he would say to us: 'In as much as you can
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of al-Bay'ah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।