أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ سَلاَّمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ يُونُسَ، عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ عَمَّارٍ، عَنِ الْهِرْمَاسِ بْنِ زِيَادٍ، قَالَ مَدَدْتُ يَدِي إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَأَنَا غُلاَمٌ لِيُبَايِعَنِي فَلَمْ يُبَايِعْنِي .
It was narrated that Al-Hirmas bin Ziyad said:"I stretched forth my hand to the Prophet for him to accept my pledge, when I was a child, but he did not accept my pledge
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan IsnaadAbu Ghuddah
Hasan IsnaadAl-Albani
Isnaad SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।