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सुनन नसाई

नंबर 4182

नंबर 4182किताब 39, नंबर 34
أَخْبَرَنَا زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ، عَنْ رَجُلٍ، مِنْ آلِ الشَّرِيدِ يُقَالُ لَهُ عَمْرٌو عَنْ أَبِيهِ قَالَ كَانَ فِي وَفْدِ ثَقِيفٍ رَجُلٌ مَجْذُومٌ فَأَرْسَلَ إِلَيْهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ارْجِعْ فَقَدْ بَايَعْتُكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrted from a man from Al Ash-Sharid, who was called 'Amr, that his father said:"Among the delegation of Thaqif there was a man who suffered from leprosy. The Prophet sent word to him saying: 'Go back, for I have accepted your pledge
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of al-Bay'ah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।