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सुनन नसाई

नंबर 3751

नंबर 3751किताब 34, नंबर 33
أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ دُرُسْتَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْمَاعِيلَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، أَنَّ أَبَا سَلَمَةَ، حَدَّثَهُ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ نَبِيِّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْعُمْرَى لِمَنْ وُهِبَتْ لَهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Isma'il said:"Yahya narrated to us that Abu Salamah narrated to him, from Jabir bin 'Abdullah, from the Prophet of Allah who said: 'A lifelong gift belongs to the one to whom it was given
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of 'Umra

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।