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सुनन नसाई

नंबर 3750

नंबर 3750किताब 34, नंबर 32
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرًا، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْعُمْرَى لِمَنْ وُهِبَتْ لَهُ ‏"‏ ‏.‏
Hisham said:"Yahya bin Abi Kathir narrated to us, he said: 'Abu Salamah bin 'Abdur-Rahman narrated to me, he said: "I heard Jabir say: 'The Messenger of Allah said: "A lifelong gift belongs to the one to whom it was given
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of 'Umra

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।