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सुनन नसाई

नंबर 3743

नंबर 3743किताब 34, नंबर 25
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحِيمِ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ أَبِي سَلَمَةَ الدِّمَشْقِيُّ، عَنْ أَبِي عُمَرَ الصَّنْعَانِيِّ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَيُّمَا رَجُلٍ أَعْمَرَ رَجُلاً عُمْرَى لَهُ وَلِعَقِبِهِ فَهِيَ لَهُ وَلِمَنْ يَرِثُهُ مِنْ عَقِبِهِ مَوْرُوثَةٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Hisham bin 'Urwah, from his father, from 'Abdullah bin Az-Zubair, that the Messenger of Allah said:"Any man who gives a lifelong gift to another man, it belongs to him (the recipient) and to his descendants, and to those who inherit from him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of 'Umra

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।