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सुनन नसाई

नंबर 3742

नंबर 3742किताब 34, नंबर 24
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ هَاشِمٍ الْبَعْلَبَكِّيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، قَالَ حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، وَأَبِي، سَلَمَةَ عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْعُمْرَى لِمَنْ أُعْمِرَهَا هِيَ لَهُ وَلِعَقِبِهِ يَرِثُهَا مَنْ يَرِثُهُ مِنْ عَقِبِهِ ‏"‏ ‏.‏
(A different chain) from Al-Awza'i, from Az-Zuhri, from 'Urwah and Abu Salamah, from Jabir, who said:"The Messenger of Allah said: 'Umra (a lifelong gift) belongs to the one to whom it was given; it belongs to him and to his descendants, and is inherited by those who inherit from him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of 'Umra

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।