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सुनन नसाई

नंबर 3719

नंबर 3719किताब 33, नंबर 14
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا حِبَّانُ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ مَعْمَرٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ دِينَارٍ، يُحَدِّثُ عَنْ طَاوُسٍ، عَنْ حُجْرٍ الْمَدَرِيِّ، عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْعُمْرَى لِلْوَارِثِ ‏"‏ ‏.‏ وَاللَّهُ أَعْلَمُ ‏.‏
(A different chain) from Ma'mar who said:"I heard 'Amr bin Dinar, narrating from Tawus, from Hujr Al-Madari, from Zaid bin Thabit, that the Messenger of Allah said: "'Umra (a gift given for life) belongs to the heir." And Allah knows best
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book of ar-Ruqba

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।