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सुनन नसाई

नंबर 3678

नंबर 3678किताब 31, नंबर 7
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حِبَّانُ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ بَشِيرًا، أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ نَحَلْتُ النُّعْمَانَ نِحْلَةً ‏.‏ قَالَ ‏"‏ أَعْطَيْتَ لإِخْوَتِهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَارْدُدْهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Hisham bin 'Urwah, from his father, that Bashir came to the Prophet and said:"O Prophet of Allah, I have given An-Nu'man a present." He said: "Have you given something to his brothers?" He said: "No." He said: "Then take it back
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Presents

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।