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सुनन नसाई

नंबर 3677

नंबर 3677किताब 31, नंबर 6
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَعْمَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سَعْدٍ، - يَعْنِي ابْنَ إِبْرَاهِيمَ - عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ بَشِيرٍ، أَنَّهُ نَحَلَ ابْنَهُ غُلاَمًا فَأَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَأَرَادَ أَنْ يُشْهِدَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏"‏ أَكُلَّ وَلَدِكَ نَحَلْتَهُ مِثْلَ ذَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَارْدُدْهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Bashir that he gave his son a slave as a present, then he came to the Prophet and he wanted the Prophet to bear witness to that. He said:"Have you given a similar present to all of your children?" He said: "No." He said: "Then take (your present) back
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Presents

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।