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सुनन नसाई

नंबर 3386

नंबर 3386किताब 26, नंबर 191
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ هَلْ تَزَوَّجْتَ ‏"‏ ‏.‏ قُلْتُ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ هَلِ اتَّخَذْتُمْ أَنْمَاطًا ‏"‏ ‏.‏ قُلْتُ وَأَنَّى لَنَا أَنْمَاطٌ قَالَ ‏"‏ إِنَّهَا سَتَكُونُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Jabir said:"The Messenger of Allah said to me: 'Have you got married?' I said: 'Yes.' He said: 'Have you got any Anmat?' I said: 'How can we afford Anmat?' He said: 'You will be able to
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।