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सुनन नसाई

नंबर 3187

नंबर 3187किताब 25, नंबर 103
أَخْبَرَنَا بِشْرُ بْنُ خَالِدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سُلَيْمَانَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عَمْرٍو الشَّيْبَانِيَّ، عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ، أَنَّ رَجُلاً، تَصَدَّقَ بِنَاقَةٍ مَخْطُومَةٍ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَيَأْتِيَنَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِسَبْعِمِائَةِ نَاقَةٍ مَخْطُومَةٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Mas'ud that a man gave a bridled camel in charity in the cause of Allah. The Messenger of Allah (ﷺ) said:"On the Day of Resurrection seven hundred bridled camels will come to you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।