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सुनन नसाई

नंबर 3161

नंबर 3161किताब 25, नंबर 77
أَخْبَرَنَا عِمْرَانُ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَجْلاَنَ، عَنِ الْقَعْقَاعِ بْنِ حَكِيمٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الشَّهِيدُ لاَ يَجِدُ مَسَّ الْقَتْلِ إِلاَّ كَمَا يَجِدُ أَحَدُكُمُ الْقَرْصَةَ يُقْرَصُهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:"The martyr does not feel the pain of being killed, except as any one of you feels a pinch
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।