सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3146

नंबर 3146किताब 25, नंबर 62
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ بْنِ سَعِيدٍ، عَنِ الْوَلِيدِ، عَنِ ابْنِ جَابِرٍ، عَنْ أَبِي سَلاَّمٍ الأَسْوَدِ، عَنْ خَالِدِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يُدْخِلُ ثَلاَثَةَ نَفَرٍ الْجَنَّةَ بِالسَّهْمِ الْوَاحِدِ صَانِعَهُ يَحْتَسِبُ فِي صُنْعِهِ الْخَيْرَ وَالرَّامِيَ بِهِ وَمُنَبِّلَهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Uqbah bin 'Amir that the Prophet (ﷺ) said:"Allah, the Mighty and Sublime, will admit three people into Paradise for one arrow: The one who makes it, intending it to be used for a good cause, the one who shoots it, and one who passes it to him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।