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सुनन नसाई

नंबर 3126

नंबर 3126किताब 25, नंबर 42
أَخْبَرَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِيمَا يَحْكِيهِ عَنْ رَبِّهِ عَزَّ وَجَلَّ قَالَ ‏ "‏ أَيُّمَا عَبْدٍ مِنْ عِبَادِي خَرَجَ مُجَاهِدًا فِي سَبِيلِ اللَّهِ ابْتِغَاءَ مَرْضَاتِي ضَمِنْتُ لَهُ أَنْ أَرْجَعَهُ إِنْ أَرْجَعْتُهُ بِمَا أَصَابَ مِنْ أَجْرٍ أَوْ غَنِيمَةٍ وَإِنْ قَبَضْتُهُ غَفَرْتُ لَهُ وَرَحِمْتُهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar, from the Prophet (ﷺ), of what he related from his Lord, the Mighty and Sublime:"And of My slaves who goes out as a Mujahid striving in the cause of Allah, seeking my pleasure, I guarantee that I will bring him back with whatever he had earned as reward or spoils of war, and if I take his (soul) I will forgive him and have mercy on him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।