सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3078

नंबर 3078किताब 24, नंबर 461
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا مِجْلَزٍ، يَقُولُ سَأَلْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ عَنْ شَىْءٍ، مِنْ أَمْرِ الْجِمَارِ فَقَالَ مَا أَدْرِي رَمَاهَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِسِتٍّ أَوْ بِسَبْعٍ ‏.‏
It was narrated the Qatadah said:"I heard Abu Mijlaz say: 'I asked Ibn 'Abbas something about the Jimar, and he said: I do not know, the Messenger of Allah stoned it with six or seven
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।