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सुनन नसाई

नंबर 3077

नंबर 3077किताब 24, नंबर 460
أَخْبَرَنِي يَحْيَى بْنُ مُوسَى الْبَلْخِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، قَالَ قَالَ مُجَاهِدٌ قَالَ سَعْدٌ رَجَعْنَا فِي الْحَجَّةِ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَبَعْضُنَا يَقُولُ رَمَيْتُ بِسَبْعِ حَصَيَاتٍ وَبَعْضُنَا يَقُولُ رَمَيْتُ بِسِتٍّ فَلَمْ يَعِبْ بَعْضُهُمْ عَلَى بَعْضٍ ‏.‏
Sad said:"We returned during the Hajj with the Prophet and some of us said that they had stoned (the Jamarat) with seven stones, and other said that they had done so with six, and no one denounced anyone else
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।