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सुनन नसाई

नंबर 3061

नंबर 3061किताब 24, नंबर 444
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا وَكِيعٌ، قَالَ حَدَّثَنَا أَيْمَنُ بْنُ نَابِلٍ، عَنْ قُدَامَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَرْمِي جَمْرَةَ الْعَقَبَةِ يَوْمَ النَّحْرِ عَلَى نَاقَةٍ لَهُ صَهْبَاءَ لاَ ضَرْبَ وَلاَ طَرْدَ وَلاَ إِلَيْكَ إِلَيْكَ ‏.‏
It was narrated that Qudamah bin Abdullah said:"I saw the Messenger of Allah stoning JamratualAqabah on the Day of Sacrifice on the reddish-brown camel of his, without beating anyone or driving them off
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।