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सुनन नसाई

नंबर 3024

नंबर 3024किताब 24, नंबर 407
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ كُرَيْبٍ، عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم حَيْثُ أَفَاضَ مِنْ عَرَفَةَ مَالَ إِلَى الشِّعْبِ قَالَ فَقُلْتُ لَهُ أَتُصَلِّي الْمَغْرِبَ قَالَ ‏ "‏ الْمُصَلَّى أَمَامَكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Usmah bin Zaid that when the Prophet departed from Arafat he turned toward the mountain pass. I said to him:"Are you going to pray Magrib?" He said: "The prayer place is still ahead of you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।