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सुनन नसाई

नंबर 3022

नंबर 3022किताब 24, नंबर 405
أَخْبَرَنِي أَبُو دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَفَاضَ مِنْ عَرَفَةَ وَجَعَلَ يَقُولُ ‏ "‏ السَّكِينَةَ عِبَادَ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ يَقُولُ بِيَدِهِ هَكَذَا وَأَشَارَ أَيُّوبُ بِبَاطِنِ كَفِّهِ إِلَى السَّمَاءِ ‏.‏
It was narrated from Jabir that the Prophet departed from Arafat and started saying:"Be tranquil, O slaves of Allah!" gesturing with his hand like this - and Ayyub gested with his palm uppermost
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।