सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2970

नंबर 2970किताब 24, नंबर 353
أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ، حَدَّثَنَا جَابِرٌ، قَالَ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِلَى الصَّفَا وَقَالَ ‏"‏ نَبْدَأُ بِمَا بَدَأَ اللَّهُ بِهِ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ قَرَأَ ‏"‏ ‏{‏ إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِنْ شَعَائِرِ اللَّهِ ‏}‏ ‏"‏ ‏.‏
Jabir said:"Messenger of Allah went out to As-Safa and said.We will start with that with which Allah started. Then he recited: 'Verifly, as-Safa and Al-Marwah (two Mountains in Makkah) are of the symbols of Allah.'" (Sahih) Chpater 169. Where To Stand On As-Safa
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।