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सुनन नसाई

नंबर 2969

नंबर 2969किताब 24, नंबर 352
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الْقَاسِمِ، قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَ خَرَجَ مِنَ الْمَسْجِدِ وَهُوَ يُرِيدُ الصَّفَا وَهُوَ يَقُولُ ‏ "‏ نَبْدَأُ بِمَا بَدَأَ اللَّهُ بِهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Jabir said:"When he went tout the Masjid heading for As-Safa, I heard the Messenger of Allah say: We will start with that with which Allah started
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।