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सुनन नसाई

नंबर 2956

नंबर 2956किताब 24, नंबर 339
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سَلَمَةَ، قَالَ سَمِعْتُ مُسْلِمًا الْبَطِينَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَتِ الْمَرْأَةُ تَطُوفُ بِالْبَيْتِ وَهِيَ عُرْيَانَةٌ تَقُولُ الْيَوْمَ يَبْدُو بَعْضُهُ أَوْ كُلُّهُ وَمَا بَدَا مِنْهُ فَلاَ أُحِلُّهُ قَالَ فَنَزَلَتْ ‏{‏ يَا بَنِي آدَمَ خُذُوا زِينَتَكُمْ عِنْدَ كُلِّ مَسْجِدٍ ‏}‏ ‏.‏
It was narrated from Saeed bin Jubair that Ibn Abbas said:"Women used to circumambulate the Kabah naked, saying: 'Today some, or all of it will appear And whatever appers I don't make is permissible.' Then the following was revealed: 'O Children of Adam! Take your adornment to every Masjid
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।