सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2937

नंबर 2937किताब 24, नंबर 320
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، وَجَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَابِسِ بْنِ رَبِيعَةَ، قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ جَاءَ إِلَى الْحَجَرِ فَقَالَ إِنِّي لأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ وَلَوْلاَ أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُبِّلُكَ مَا قَبَّلْتُكَ ‏.‏ ثُمَّ دَنَا مِنْهُ فَقَبَّلَهُ ‏.‏
It was narrated Abbas bin Rabiah said:"I saw Umar coming to the Stone and saying: 'I know that you are just a stone; had I not seen the Messenger of Allah kiss you I would not have kissed you.' Then he came close to it and kissed it." (Sahih) Chpater 148. How to Kiss It
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।