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सुनन नसाई

नंबर 2910

नंबर 2910किताब 24, नंबर 293
أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، عَنِ ابْنِ أَبِي زَائِدَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي سُلَيْمَانَ، عَنْ عَطَاءٍ، قَالَ ابْنُ الزُّبَيْرِ سَمِعْتُ عَائِشَةَ، تَقُولُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَوْلاَ أَنَّ النَّاسَ حَدِيثٌ عَهْدُهُمْ بِكُفْرٍ وَلَيْسَ عِنْدِي مِنَ النَّفَقَةِ مَا يُقَوِّي عَلَى بِنَائِهِ لَكُنْتُ أَدْخَلْتُ فِيهِ مِنَ الْحِجْرِ خَمْسَةَ أَذْرُعٍ وَجَعَلْتُ لَهُ بَابًا يَدْخُلُ النَّاسُ مِنْهُ وَبَابًا يَخْرُجُونَ مِنْهُ ‏"‏ ‏.‏
Aishah said:"The Prophet said: 'Were it not for the fact that the people have recently left disbelief, and that I do not have enough funds to enable me to build it. I would have incorporated five cubits of the Hijr in it, and given it a door through which the people could enter, and another door through which they exit
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।