सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2909

नंबर 2909किताब 24, नंबर 292
أَخْبَرَنَا حَاجِبُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْمَنْبِجِيُّ، عَنِ ابْنِ أَبِي رَوَّادٍ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ، قَالَ دَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْكَعْبَةَ فَسَبَّحَ فِي نَوَاحِيهَا وَكَبَّرَ وَلَمْ يُصَلِّ ثُمَّ خَرَجَ فَصَلَّى خَلْفَ الْمَقَامِ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ هَذِهِ الْقِبْلَةُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Usmah bin Zaid said:"The Messenger of Allah entered the Kabah and recited the Tasbih and the Takbir in its corners, but he did not pray. Then he came out and prayed two Rakahs behind the Maqam, then he said: 'This is Qiblah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • MunkarAbu Ghuddah
  • MunkarAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।