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सुनन नसाई

नंबर 2844

नंबर 2844किताब 24, नंबर 227
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَيُّوبَ بْنِ مُوسَى، عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ، قَالَ أَرْسَلَ عُمَرُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ مَعْمَرٍ إِلَى أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ يَسْأَلُهُ أَيَنْكِحُ الْمُحْرِمُ فَقَالَ أَبَانُ إِنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ حَدَّثَ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَنْكِحُ الْمُحْرِمُ وَلاَ يَخْطُبُ ‏"‏ ‏.‏
Uthaman bin Affan narrated that the Prohet said:"The Muhrim should not get or propose marriage
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।