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सुनन नसाई

नंबर 2843

नंबर 2843किताब 24, नंबर 226
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ، عَنْ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ نَهَى أَنْ يَنْكِحَ الْمُحْرِمُ أَوْ يُنْكِحَ أَوْ يَخْطُبَ ‏.‏
It was narrated from Aban bin Uthamn, from his father:That the Prophet forbade the Muhrim to get married, arrange a marriage for anyone else, or propose marriage
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।