أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مَثْرُودٍ، عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ، قَالَ ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ أَبَاهُ، قَالَ بَاتَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِذِي الْحُلَيْفَةِ بِبَيْدَاءَ وَصَلَّى فِي مَسْجِدِهَا .
Ubaidullah bin 'Abdullah bin 'Umar narrated that his father said:"The Messenger of Allah stayed overnight in dhul-Hulaifah, where he started his Hajj with this action, and he prayed in the Masjid there.''(sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।