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सुनन नसाई

नंबर 2646

नंबर 2646किताब 24, नंबर 28
أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ السَّرِيِّ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ كُرَيْبٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ رَفَعَتِ امْرَأَةٌ صَبِيًّا لَهَا مِنْ هَوْدَجٍ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلِهَذَا حَجٌّ قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ وَلَكِ أَجْرٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"A woman lifted up a child of hers from a howdah (litter) and said: 'O Messenger of Allah, is there Hajj for this one?' He said: 'Yes, and you will be rewarded.'''(sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।