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सुनन नसाई

नंबर 2645

नंबर 2645किताब 24, नंबर 27
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ كُرَيْبٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ امْرَأَةً، رَفَعَتْ صَبِيًّا لَهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلِهَذَا حَجٌّ قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ وَلَكِ أَجْرٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas that:a woman helf up a child of hers to the Messenger of Allah and said: "O Messenger of Allah, is there Hajj for this one?" He said: "Yes, and you will be rewarded. (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।