सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2594

नंबर 2594किताब 23, नंबर 160
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ أَنْبَأَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، عَنْ سُفْيَانَ بْنِ عُيَيْنَةَ، عَنْ دَاوُدَ بْنِ شَابُورَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ سَأَلَ وَلَهُ أَرْبَعُونَ دِرْهَمًا فَهُوَ الْمُلْحِفُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Amr bin Shu'aib, from his father, that his grandfather said:"The Messenger of Allah said: 'Whoever asks when he has forty Dirhams I being too demanding when asking
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।