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सुनन नसाई

नंबर 2593

नंबर 2593किताब 23, नंबर 159
أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ وَهْبِ بْنِ مُنَبِّهٍ، عَنْ أَخِيهِ، عَنْ مُعَاوِيَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تُلْحِفُوا فِي الْمَسْأَلَةِ وَلاَ يَسْأَلْنِي أَحَدٌ مِنْكُمْ شَيْئًا وَأَنَا لَهُ كَارِهٌ فَيُبَارَكُ لَهُ فِيمَا أَعْطَيْتُهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Mu'awiyah that the Messenger of Allah said:"Do not be demanding when asking. If one of you asks me for anything and I give it reluctantly, there will be no blessing in it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।