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सुनन नसाई

नंबर 2557

नंबर 2557किताब 23, नंबर 123
أَخْبَرَنَا هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنِ ابْنِ مُنَبِّهٍ، عَنْ أَخِيهِ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ إِنَّ الرَّجُلَ لَيَسْأَلُنِي الشَّىْءَ فَأَمْنَعُهُ حَتَّى تَشْفَعُوا فِيهِ فَتُؤْجَرُوا ‏"‏ ‏.‏ وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ اشْفَعُوا تُؤْجَرُوا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Mu'awiyah bin Sufyan that the Messenger of Allah said:"A man may come and ask for something, and I refuse until you intercede, so that you will be rewarded." And the Messenger of Allah said: "Intercede and you will be rewarded
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।