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सुनन नसाई

नंबर 2556

नंबर 2556किताब 23, नंबर 122
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو بُرْدَةَ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ جَدِّهِ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ اشْفَعُوا تُشَفَّعُوا وَيَقْضِي اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى لِسَانِ نَبِيِّهِ مَا شَاءَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Musa that the Prophet said:"Intercede and your intercession may be accepted, and Allah, the Mighty and Sublime, decrees on the lips of His Prophet whatsoever He will
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।