सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2544

नंबर 2544किताब 23, नंबर 110
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ سَوَّادِ بْنِ الأَسْوَدِ بْنِ عَمْرٍو، عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ خَيْرُ الصَّدَقَةِ مَا كَانَ عَنْ ظَهْرِ غِنًى وَابْدَأْ بِمَنْ تَعُولُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah said: "The best of charity is that which is given when you are self-sufficient, and start with those for whom you are responsible
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।