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सुनन नसाई

नंबर 2474

नंबर 2474किताब 23, नंबर 40
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ أَنْبَأَنَا ابْنُ الْقَاسِمِ، عَنْ مَالِكٍ، قَالَ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ الْمَازِنِيُّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَيْسَ فِيمَا دُونَ خَمْسِ أَوْسُقٍ مِنَ التَّمْرِ صَدَقَةٌ وَلَيْسَ فِيمَا دُونَ خَمْسِ أَوَاقٍ مِنَ الْوَرِقِ صَدَقَةٌ وَلَيْسَ فِيمَا دُونَ خَمْسِ ذَوْدٍ مِنَ الإِبِلِ صَدَقَةٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Sa 'eed Al-Khudri that the Messenger of Allah said:"No Sadaqah is due on lessthan five Awsuq of dates, no Sadaqah is due on less than five Awaq of silver, and no Sadaqah is due on less than five Dhawd (head) of camels
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।