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सुनन नसाई

नंबर 2059

नंबर 2059किताब 21, नंबर 242
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ شُعْبَةَ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَوْنُ بْنُ أَبِي جُحَيْفَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ، عَنْ أَبِي أَيُّوبَ، قَالَ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَعْدَ مَا غَرَبَتِ الشَّمْسُ فَسَمِعَ صَوْتًا فَقَالَ ‏ "‏ يَهُودُ تُعَذَّبُ فِي قُبُورِهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Ayyub said:"The Messenger of Allah went out after the sun had set, and heard a sound. He said '(It is ) Jews being tormented in their graves
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।