सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2027

नंबर 2027किताब 21, नंबर 210
أَخْبَرَنَا هَارُونُ بْنُ إِسْحَاقَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَفْصٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ مُوسَى، وَأَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ ‏:‏ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُبْنَى عَلَى الْقَبْرِ، أَوْ يُزَادَ عَلَيْهِ، أَوْ يُجَصَّصَ ‏.‏ زَادَ سُلَيْمَانُ بْنُ مُوسَى ‏:‏ أَوْ يُكْتَبَ عَلَيْهِ ‏.‏
It was narrated that Jabir said:"The Messenger of Allah forbade building over graves, making them larger or plastering over them." (One of two narrators) Sulaiman bin Musa added: "Or writing on them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।