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सुनन नसाई

नंबर 2011

नंबर 2011किताब 21, नंबर 194
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَعْمَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ، سَمِعْتُ حُمَيْدَ بْنَ هِلاَلٍ، عَنْ سَعْدِ بْنِ هِشَامِ بْنِ عَامِرٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ ‏:‏ لَمَّا كَانَ يَوْمُ أُحُدٍ أُصِيبَ مِنَ الْمُسْلِمِينَ، وَأَصَابَ النَّاسَ جِرَاحَاتٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏ "‏ احْفِرُوا وَأَوْسِعُوا، وَادْفِنُوا الاِثْنَيْنِ وَالثَّلاَثَةَ فِي الْقَبْرِ، وَقَدِّمُوا أَكْثَرَهُمْ قُرْآنًا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Sa'eed bin Hisham bin 'Amir that his father said:"On the day of Uhud some of the people among the Muslims were killed, and people were wounded. The Messenger of Allah said: 'Dig graves and make them wide, and bury two or three in a grave, and put the one who knew more Qur'an in first
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।