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सुनन नसाई

नंबर 1989

नंबर 1989किताब 21, नंबर 172
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ، أَنَّهُ قَالَ السُّنَّةُ فِي الصَّلاَةِ عَلَى الْجَنَازَةِ أَنْ يَقْرَأَ فِي التَّكْبِيرَةِ الأُولَى بِأُمِّ الْقُرْآنِ مُخَافَتَةً ثُمَّ يُكَبِّرَ ثَلاَثًا وَالتَّسْلِيمُ عِنْدَ الآخِرَةِ ‏.‏
(It was narrated that Abu Umamah said:"The Sunnah, when offering the funeral prayer, is to recite Umm Al-Qur'an) the Exxence of the Qur'an) quietly in the first Takbir, Then to say three (more) Takbir and to say the Taslim after the last one
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।