सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 1968

नंबर 1968किताब 21, नंबर 151
أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ عَبْدِ الْوَاحِدِ بْنِ حَمْزَةَ، أَنَّ عَبَّادَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، أَخْبَرَهُ أَنَّ عَائِشَةَ قَالَتْ مَا صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى سُهَيْلِ ابْنِ بَيْضَاءَ إِلاَّ فِي جَوْفِ الْمَسْجِدِ ‏.‏
It was narrated from 'Abdul-Wahid bin Hamzah that 'Abbad bin 'Abdullah bin Az-Zubair told him that 'Aishah said:"the Messenger of Allah did not offer the funeral prayer for Suhail bin Baida anywhere but inside the Masjid
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।