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सुनन नसाई

नंबर 1967

नंबर 1967किताब 21, नंबर 150
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَبْدِ الْوَاحِدِ بْنِ حَمْزَةَ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى سُهَيْلِ ابْنِ بَيْضَاءَ إِلاَّ فِي الْمَسْجِدِ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The Messenger of Allah did not ofer gthe funeral prayer for shail bin Baida anywhere but in the Masjid
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।