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सुनन नसाई

नंबर 1946

नंबर 1946किताब 21, नंबर 129
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، وَعَمْرُو بْنُ زُرَارَةَ النَّيْسَابُورِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَبِي الْمُهَلَّبِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ أَخَاكُمْ قَدْ مَاتَ فَقُومُوا فَصَلُّوا عَلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Imran bin Husain said:"The Messenger of Allah said: 'Your brother has died, so get up and pray for him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।