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सुनन नसाई

नंबर 1940

नंबर 1940किताब 21, नंबर 123
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْثَرٌ، عَنْ بُرْدٍ، أَخِي يَزِيدَ بْنِ أَبِي زِيَادٍ عَنِ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ، قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ بْنَ عَازِبٍ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ تَبِعَ جَنَازَةً حَتَّى يُصَلَّى عَلَيْهَا كَانَ لَهُ مِنَ الأَجْرِ قِيرَاطٌ وَمَنْ مَشَى مَعَ الْجَنَازَةِ حَتَّى تُدْفَنَ كَانَ لَهُ مِنَ الأَجْرِ قِيرَاطَانِ وَالْقِيرَاطُ مِثْلُ أُحُدٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Al-Musayyab bin Rafi' said:"I heard Al-Bara' bin 'Azib say: The Messenger of Allah said: 'whoever follows a Janazah until the prayer is offered, he will have one Qirat of reward and whoever walks with the funeral until (the body) is buried will have two Qirats of reward, and a Qirat is like Uhud
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।