सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 1936

नंबर 1936किताब 21, नंबर 119
أَخْبَرَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ، عَنْ بِشْرٍ، - وَهُوَ ابْنُ الْمُفَضَّلِ - عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سُلَيْمَانَ الأَعْمَشِ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تَسُبُّوا الأَمْوَاتَ فَإِنَّهُمْ قَدْ أَفْضَوْا إِلَى مَا قَدَّمُوا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The Messenger of Allah said: 'Do not verbally abuse the dead, for they have reached the consequences of what they did
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।