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सुनन नसाई

नंबर 1873

नंबर 1873किताब 21, नंबर 56
أَخْبَرَنَا يُوسُفُ بْنُ حَمَّادٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا مِنْ مُسْلِمٍ يُتَوَفَّى لَهُ ثَلاَثَةٌ مِنَ الْوَلَدِ لَمْ يَبْلُغُوا الْحِنْثَ إِلاَّ أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ بِفَضْلِ رَحْمَتِهِ إِيَّاهُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Anas said:"The Messenger of Allah said: 'There is no Muslim, three of whose children die before reaching puberty, but Allah will admit him to Paradise by virtue of His mercy towards them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।