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सुनन नसाई

नंबर 1850

नंबर 1850किताब 21, नंबर 33
أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ سَيْفٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ قَالَ سَالِمٌ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، يَقُولُ قَالَ عُمَرُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يُعَذَّبُ الْمَيِّتُ بِبُكَاءِ أَهْلِهِ عَلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn Shihab said:"Salim said: 'I heard 'Abdullah bin 'Umar say: 'Umar said: The Messenger of Allah said: The deceased is punished due to his family's weeping for him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।