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सुनन नसाई

नंबर 1782

नंबर 1782किताब 20, नंबर 185
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَثَّامُ بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي رَكْعَتَىِ الْفَجْرِ إِذَا سَمِعَ الأَذَانَ وَيُخَفِّفُهُمَا ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ هَذَا حَدِيثٌ مُنْكَرٌ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"The Prophet (ﷺ) used to pray two rak'ahs of Fajr when he heard the Adhan and he made them brief
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।