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सुनन नसाई

नंबर 1779

नंबर 1779किताब 20, नंबर 182
أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ عِيسَى، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ أَخْبَرَتْنِي حَفْصَةُ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا أَضَاءَ لَهُ الْفَجْرُ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated from Salim that his father said:"Hafsah told me that when dawn glowed, the Messenger of Allah (ﷺ) would pray two rak'ahs
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।